Friday, December 15, 2023

श्रीरामचरितमानस

श्री सहीत दिनकर बंस भूषन काम छबि सोहई।
          नव अंबुधर बर गात अंबर पीत सुर मन मोहई ।।
मुकुटांगदादि बिचित्र भूषन  अंग अंगन्हि पृति सजे ।
         अंभोज नयन बिसाल उर भुज धन्य नर निरखंति जे ।।

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